banner image

राजस्थान का नामकरण[1]

राजस्थान का नामकरण


 इस चैप्टर को सही तरीके से समझने के लिए इस वीडियो को जरूर देखें👇👇👇👇👇👇

https://youtu.be/d1CL0e7SBFQ

 ऋग्वेद में राजस्थान में स्थिति भूभाग को ब्रह्मवर्त व रामायण काल में वाल्मीकि ने मरुकांतार नाम दिया, तो राजस्थान को मरू प्रदेश, मरू, मरुवार, रायथान, राजपूताना, रजवाड़ा,  आदि नामो से आज तक जाना जाता है।

 आयरलैंड के निवासी जॉर्ज थॉमस ने स्वतंत्र रूप से सर्वप्रथम गवालियर के पश्चिम में स्थित राजपूत रियासतों के समूह को सन् 1800 ई. में राजपूताना नाम से संबोधित किया। उस समय जॉर्ज थॉमस ग्वालियर के मराठा शासक दौलतराव सिंधिया का अंग्रेजी कमांडर था।

  •  जॉर्ज थॉमस राजस्थान में सर्वप्रथम 1758 शेखावाटी क्षेत्र में आया था।
  •  जॉर्ज थॉमस की मृत्यु बीकानेर में हुई थी।

 1805 ईसवी में  विलियम फ्रैंकलीन ने अपनी पुस्तक "मिलिट्री मैंबार्स ऑफ मिस्टर" जॉर्ज थॉमस में लिखा कि जॉर्ज थॉमस वह पहला व्यक्ति था जिसने राजपूताना शब्द का प्रयोग किया अर्थात राजपूताना शब्द का सर्वप्रथम लिखित प्रमाण हमें 1805 ईसवी में मिलता है - ध्यान रहे:- इस पुस्तक का प्रकाशन लॉर्ड वेलेजली ने किया था।

  • ब्रिटिश कालिया मध्यकाल मैं राजस्थान को राजपूताना के नाम से जाना जाता था तो ब्रिटिश काल में राजस्थान के इतिहास लेखन का सर्वप्रथम प्रयास करने वाले प्रथम व्यक्ति श्याम लाल दास थे जिनकी पुस्तक का नाम वीर विनोद था।
राजस्थान शब्द का प्राचीनतम उल्लेख विक्रम सम्वत 682 (625 ईसा पूर्व) खीमज माता मंदिर बसंतगढ़ सिरोही पर उत्कीर्ण बसंतगढ़ शिलालेख में मिलता है, जहां राजस्थानांयादित्य शब्द का प्रयोग किया गया था लेकिन इस शब्द से यह पता नहीं चलता कि यह शब्द किसी क्षेत्र विशेष के लिए प्रयुक्त हुआ है या किसी व्यक्ति विशेष के लिए।

  • बसंत शिलालेख चामुंडा वंश के शासक वर्मलात के शासनकाल में दास प्रथा पर उत्कीर्ण था।
राजस्थान का प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ मोहे:- 'मुहणौत नैणसी री ख्यात ' 1665 ई. में मुहणौत नैणसी/राजस्थान  का अबुल फजल द्वारा रचित व 'रजरूपक' 1731  ई.  में वीरभाण द्वारा रचित ग्रन्थ में पहली बार 'राजस्थान' शब्द का प्रयोग हुआ था। लेकिन यह शब्द राजपूताना भूभाग के लिए ही किया गया था।

  जिस प्रकार विश्व के इतिहास का जनक हीरो डॉटर्स, भारत के इतिहास का जनक  वेदव्यास जी है उसी प्रकार राजस्थान के इतिहास का जनक पितामह कर्नल जेम्स टॉड को कहा जाता है क्योंकि टॉड राजस्थान का प्रथम इतिहासकार था जिसने पहली बार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समस्त राजस्थान का इतिहास लिखा था।


  •  पंडित गौरी शंकर हरिश्चंद्र  ओझा को  राजस्थान  इतिहास का वास्तविक जनक कहा जाता है।
राजस्थान के इतिहास के जनक कर्नल जेम्स टॉड का जन्म लिंगटन शहर (स्कॉटलैंड इंग्लैंड) 20 मार्च 1782 ईसवी में हुआ। कर्नल जेम्स टॉड पहली बार भारत में दिल्ली में एक सैनिक रंग रूट के रूप में आए तो राजस्थान में पहली बार 1817 ईं. में मेवाड़, हाड़ोती, कोटा, बूंदी क्षेत्र में रेजीडेंट के पद पर नियुक्त हुए कर्नल जेम्स टॉड राजस्थान में सर्वप्रथम मांडलगढ़ भीलवाड़ा में आकर रुके और वहां के जैनयति ज्ञान चंद को अपना गुरु बनाया तथा "द एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान" नामक पुस्तक इन्हीं को समर्पित की थी। इन्हीं गुरु की प्रेरणा से टोल्ड घोड़े पर बैठकर ऐतिहासिक सामग्री जुटाई इसी कारण कर्नल जेम्स टॉड को हम घोड़े वाले बाबा के नाम से भी जानते है।

कर्नल जेम्स टॉड के कहने पर 1818 में मेवाड़ के राजा भीम सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि की तो अंग्रेजों को धीरे धीरे टॉड पर शक होने लगा कि कहीं यह राजपूतों के साथ नहीं मिल जाए इसी कारण 1822 में कर्नल जेम्स टॉड बीमारी का बहाना बनाकर वापस इंग्लैंड चला गया।

  • कर्नल जेम्स टॉड ने इंग्लैंड जाते समय मानमोरी शिलालेख को समुद्र में फेंक दिया था।
इंग्लैंड जाकर टॉड राजस्थान से हुई ऐतिहासिक सामग्री का अध्ययन कर एक पुस्तक तैयार कि जिससे 1829 ईसवी में जेम्स क्रुक ने लंदन से "एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान" के नाम से प्रकाशित की। इसी पुस्तक को हम "द सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ इंडिया" के नाम से भी जानते हैं। यह पुस्तक दो भागों में प्रकाशित हुई 1829 ईसवी में प्रकाशित एनाल्स के प्रथम भाग में राजपूताने की भौगोलिक स्थिति वंशावली में मेवाड़ के इतिहास का वर्णन है जो 1835 ईस्वी में प्रकाशित एनाल्स के दूसरे भाग में मारवाड़, बीकानेर, जालौर, जैसलमेर, अजमेर, आदि के इतिहास का वर्णन है ध्यान रहे:- टॉड ने यह पुस्तक अपने गुरु जैनयति ज्ञानचद  को समर्पित की थी।


  • 19 वीं शताब्दी के इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने ही पहली बार  1829ईं. अपनी पुस्तक  "'एनाल्स एण्ड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान"' में राजपुताना भूभाग के लिए रायथन /राजवाड़ा /राजस्थान शब्द ( राजस्थान का शाब्दिक अर्थ राजाओं का आवास होता है | ) का प्रयोग किया एवं इसी पुस्तक में राजस्थान में पाई जाने वाली जागीरदारी / सामंतवादी /जमींदारी व्यवस्था /फ्यूडीलिज्म का उल्लेख मिलता हैं 
"एनाल्स एण्ड एंटीक्विटीज ऑफ़ राजस्थान" पुस्तक मूलत; अंग्रेजी में लिखी गई थी , जिसका पहली बार हिंदी अनुवाद 1907 से 1909 की अवदी  में पंडित बलदेव प्रसाद मिश्र ने एवं दूसरी बार पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने किया था ओझा जी ने मूलत; सिरोही के रोहिड़ा ग्राम के निवासी थे।


  • रोहिड़ा वृक्ष का फूल राजस्थान राज्य का राज्य पुष्प है।
1835 ईस्वी में कर्नल जेम्स टॉड की मृत्यु होने के बाद 1839 ईसवी में कर्नल जेम्स की दूसरी पुस्तक "पश्चिम भारत की यात्रा"  "द ट्रेवल्स इन वेस्टर्न इंडिया" का प्रकाशन डॉट की पत्नी जूलिया  क्लटरबक ने किया जिसमें राजपूती परंपराओं अंधविश्वासों, आदिवासियों के जीवन मूर्तियां आदि का इतिहास है।

  • कर्नल जेम्स टॉड ने आबू पर्वत पर स्थित अनेक देव मंदिरों के कारण आबू पर्वत को हिंदू ओलंपस एवं गुरु शिखर को संतो का शिखर कहां है 
  •  कर्नल जेम्स टॉड की सेवाओं से प्रभावित होकर उदयपुर महाराज भीम सिंह ने अजमेर के बोरसवाड़ा गांव का नाम टॉडगढ़ रखा।
कर्नल जेम्स टॉड (घोड़े वाला बाबा) ने 1829 इसवी में प्रकाशित अपनी पुस्तक "द एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान" इसी पुस्तक का दूसरा नाम द सेंटर एंड वेस्टर्न राजपूताना स्टेटस ऑफ इंडिया में इसे राजस्थान, रजवाड़ा, रायथान, नाम दिया तो पहली बार राजस्थान शब्द का प्रयोग राजस्थान के एकीकरण के द्वितीय चरण 25 मार्च 1948 को गठित पूरे राजस्थान संघ में दिया गया।

30 मार्च 1949 ईसवी को चार बड़ी रियासतों (जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, व बीकानेर) का एकीकरण हुआ वह लगभग वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ था इसलिए प्रतिवर्ष राजस्थान दिवस 30 मार्च को मनाया जाता है 26 जनवरी 1985 को भारत सरकार ने इसे राजस्थान राज्य की मान्यता प्रदान की राजधानी जयपुर (पी सत्यनारायण समिति के आधार पर) को बनाया क्योंकि इस दिन भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ था राजस्थान के पूर्व एकीकरण के समय अर्थात 1 नवंबर 1956 ईस्वी को राज्य में 26 जिले (26 वा जिला अजमेर) थे स्वतंत्रता प्राप्ति के समय राजस्थान में 19 देसी रियासतें 3 ठिकाने - लावा (पहले जयपुर रियासत में वर्तमान में टोंक जिले मेंकुशलगढ़ (बांसवाड़ा) और नीमराना (अलवर) एवं केंद्र शासित प्रदेश (अजमेर मेरवाड़ा) थे। 

सर्वप्रथम राजस्थान को 30 मार्च 1949 को एकीकरण के दौरान बी श्रेणी के राज्य का दर्जा दिया गया एवं हीरालाल शास्त्री को राज्य का प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री बनाया गया प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के लिए संभागीय व्यवस्था शुरू की गई और सर्वप्रथम 5 संभाग (जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर) बनाए गए संभागीय व्यवस्था में 'संभागीय आयुक्त' (Divisional Commissioner पद स्थापित करते हुए कोटा के संभागीय आयुक्त को 'सिंचित क्षेत्रीय विकास आयुक्त' जोधपुर के संभागीय आयुक्त को 'मरू विकास आयुक्त' एवं उदयपुर के संभागीय आयुक्त को 'जनजाति क्षेत्रीय आयुक्त' का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है जो वर्तमान में भी चल रहा है) 1 नवंबर 1956 को अजमेर को 26 वाँ जिला में छठा संभाग बनाया गया 24 अप्रैल 1962 में मोहनलाल सुखाड़िया ने संभागीय व्यवस्था को समाप्त कर दिया। हरिदेव जोशी ने 26 जनवरी 1987 में पुनः संभागीय व्यवस्था को शुरू किया 4 जून 2005 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भरतपुर को संभाग बनाने की घोषणा की
ध्यान रहे:- एक नवंबर 1956 से राज्य में राज्यपाल का पद सर्जन किया गया राज्य के प्रथम राज्यपाल निहाल सिंह को बनाया गया जिसे आमेर के राजा मानसिंह ने शपथ दिलाई।

  •  राजस्थान राज्य में कुल सात संभाग एवं 33 जिले हैं नवीनतम संभाग भरतपुर संभाग है जिसका निर्माण 4 जून 2005 ई. को किया गया ।
  •  नवीनतम जिला प्रतापगढ़ है जिसका निर्माण चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा, तीनों जिलों को तोड़कर रमेश चंद्र कमेटी के आधार पर 26 जनवरी 2008 को किया गया।

संभागो को याद रखने की ट्रिक


उदय अज व जो को बीका कर भर दो

उदय - उदयपुर                  अ-अजमेर
ज - जयपुर                      जो-जोधपुर
को-कोटा                        बिका- बीकानेर
भर-भरतपुर

  • जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा जयपुर संभाग ,जनसंख्या की दृष्टि से कोटा संभाग सबसे छोटा क्षेत्रफल की दृष्टि से जोधपुर संभाग सबसे बड़ा क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा भरतपुर संभाग, राज्य का सबसे नवीनतम संभाग राजस्थान में सर्वाधिक नदियों वाला कोटा संभाग है।
उदयपुर संभाग के जिलों को याद रखने की ट्रिक

 उदय व प्रताप रांची में डूबा (मेवाड़ क्षेत्र)

उदयपुर 
प्रतापगढ़
राजसमंद
चित्तौड़गढ़
डूंगरपुर 
बांसवाड़ा

अजमेर संभाग के जिलों को याद रखने की ट्रिक

अभी ना टोंक

अजमेर
भीलवाड़ा
नागौर  
टोंक

जयपुर संभाग के जिलों को याद रखने की ट्रिक

 अजय सीकर से दो झुन्झुने लाना

अलवर 
सीकर 
दोसा 
जयपुर 
झुंझुनू

जोधपुर संभाग के जिलों को याद रखने की ट्रिक

JJJ बासपा

जैसलमेर 
जालौर 
जोधपुर 
बाड़मेर 
सिरोही 
पाली

कोटा संभाग के जिलों को याद रखने की ट्रिक

 बाबू को झोला दे

बारा 
बूंदी 
कोटा 
झालावाड़

  • कोटा राजस्थान का एकमात्र ऐसा जिला है जिसे जिलों की श्रेणी से अलग करने पर राजस्थान के दो भाग हो जाते हैं क्योंकि कोटा को अलग करने से झालावाड़ व बारा का संपर्क राजस्थान से नहीं रहता है।

बीकानेर संभाग के जिलों को याद रखने की ट्रिक

बिग चूहा

बीकानेर 
गंगानगर 
चूरु 
हनुमानगढ़

 भरतपुर संभाग के जिलों को याद रखने की ट्रिक

बीएससी की कॉलेज धौलपुर में है।

भरतपुर 
सवाई माधोपुर 
करौली 
धौलपुर


राजस्थान के निर्माण के उपरांत भरतपुर से प्रथक होकर धौलपुर, जयपुर से दोसा, कोटा से बारा, उदयपुर से राजसमंद, श्री गंगानगर से हनुमानगढ़, सवाई माधोपुर से करोली तथा चित्तौड़गढ़ उदयपुर व बांसवाड़ा से प्रतापगढ़ नए जिले परमेश चंद कमेटी के आधार पर 26 जनवरी 2008 को बनाए गए हैं।



राजस्थान के एकीकरण के बाद बने नवीन जिलों को याद रखने की ट्रिक


अंधो व बादो के राज पर हक प्रताप का है

अजमेर (26 वा जिला)
धौलपुर (27 वा जिला)
बारा (28 वा जिला)
दोसा (29 वा जिला)
राजसमंद ( 30 वा जिला)
हनुमानगढ़ (31 वा जिला)
करौली (32 वा जिला)
प्रतापगढ़ (33 वां जिला)

महत्वपूर्ण जानकारी👇👇👇👇


राजस्थान का नामकरण[1] राजस्थान का नामकरण[1] Reviewed by Dharmaram on April 02, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.